GYAN NIKETAN PUBLIC SCHOOL

कहते है । शिक्षा बांटने से बढ़ती है और शिखा को बाटने से उतना ही पुन्न मिलता है । जितनी किस्से भूखे को खाना खिलाने पर । किसी महापुरष ने ठीक ही कहा है :-
अगर आप किसी भूखे को खाना खिलाते हो तो आपकी एक पीढ़ी का उधार हो जाता है ।
अगर आप किसी को पैसे देकर मदद करते हो तो उसकी दो पीढ़ी का उधार हो जाता है ।
परन्तु अगर आप शिक्षा प्रदान करते हो , तो उसकी कितनी पीढीयो का उधार होगा और वो पता नहीं कितनी पीढीयो का उधार करेगा । इसलिए शिक्षा एक ऐसा धन है । जो न कोई चुरा सकता है । और ना ही कोई छीन सकता है । बल्कि इसको बाटने से लोगो का भला जरूर होता है ।

इसी कार्य को लोगो तक पहुँचाने के लिए आपका अपना ज्ञान निकेतन पब्लिक स्कूल प्रयासरत है । इस स्कूल को सन-2001 में श्री राकेश कुमार सिंह ने गरीब बच्चो में शिक्षा के उद्देश्य से किराए पर खोला । इस संस्था के पास सन-2001 में 40 बचे थे । स्कूल किराए पर होने के कारण बच्चों को  सहूलतों  की कमीं थी । लेकिन उद्देश सिर्फ शिक्षा प्रदान करवाना था । स्कूल के अद्यापक और अद्यपिकाओं की मेहनत और लगन से शिक्षा का ठीक ढंग से विस्तार किया गया । स्कूल प्रबंधक की कड़ी मेहनत से इस संस्था में कुछ सहूलतो की वयवस्था की गयी । स्कूल के अद्यापक तथा बच्चो की मेह्नत रंग लाने लगी । संस्था में पढ़ने वाले विधार्थीओ नतीजों में अच्छे प्रदर्शन को देखकर और भी बच्चों ने स्कूल में दाखिला लिया ।

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